राजनांदगांव 28 जुलाई 2026। राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में भारतीय जनता पार्टी को उस वक्त बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब शहर भाजपा मंडल के 111 कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का दावा किया। इस घटनाक्रम ने न केवल स्थानीय संगठन में हलचल मचा दी है, बल्कि प्रदेश भाजपा की अंदरूनी राजनीति को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे सामूहिक इस्तीफा पत्र में कार्यकर्ताओं ने संगठन की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस्तीफा देने वाले सदस्यों का कहना है कि पार्टी में समर्पित और लंबे समय से जुड़े कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है, जबकि निर्णय कुछ चुनिंदा लोगों के प्रभाव में लिए जा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक राजनांदगांव शहर मंडल अध्यक्ष जसमीत सिंह बन्नौआना की कार्यशैली को लेकर लंबे समय से कार्यकर्ताओं में असंतोष था। इस्तीफा पत्र में आरोप लगाया गया है कि संगठन में जिम्मेदारियों के वितरण से लेकर नियुक्तियों तक पारदर्शिता नहीं बरती गई और सक्रिय कार्यकर्ताओं को लगातार नजरअंदाज किया गया। कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि संगठन के फैसलों पर कुछ प्रभावशाली नेताओं का दबाव रहता है, जिसके कारण पार्टी के भीतर गुटबाजी और असंतोष बढ़ता गया। सामूहिक इस्तीफा पत्र में प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष रामजी भारती सहित कुछ स्थानीय नेताओं के प्रभाव का भी उल्लेख किया गया है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कई अहम पदों पर नियुक्तियां योग्यता और संगठनात्मक कार्य के बजाय व्यक्तिगत समीकरणों के आधार पर की गईं।
भाजपा युवा मोर्चा के शहर अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर शहर मंडल अध्यक्ष जसमीत सिंह बन्नौआना, प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष रामजी भारती, भाजपा जिलाध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत अथवा पार्टी संगठन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सामूहिक इस्तीफे का दावा सही है, तो यह भाजपा संगठन के लिए एक गंभीर संगठनात्मक चुनौती हो सकती है। खासतौर पर ऐसे समय में जब पार्टी आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों की तैयारी में जुटी है, कार्यकर्ताओं की नाराजगी नेतृत्व के लिए चिंता का विषय बन सकती है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रदेश नेतृत्व इस मामले को किस तरह संभालता है। क्या नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने की कोशिश होगी या संगठन इस विवाद पर कोई बड़ा फैसला लेगा, यह आने वाले दिनों में साफ हो सकेगा। फिलहाल, डोंगरगढ़ से उठी यह राजनीतिक हलचल छत्तीसगढ़ भाजपा की अंदरूनी स्थिति को लेकर नई बहस छेड़ रही है।

