जशपुर 11 अक्टूबर 2026। जशपुर जिले में जंगल से भटककर आया एक लोनर हाथी रविवार सुबह कुनकुरी शहर में घुस गया। हाथीसीधे महागिरजाघर और होलीक्रॉस अस्पताल परिसर तक पहुंच गया। इस दौरान दंतैल ने अस्पताल की बाउंड्रीवाल को क्षतिग्रस्त कर दिया। शहर के बीचोंबीच हाथी की मौजूदगी से लोगों में अफरा-तफरी मच गई। चर्च में प्रार्थना सभा के लिए पहुंचे श्रद्धालु भी घबरा गए और सुरक्षित स्थान पर जाकर छिप गए। राहत की बात यह है कि अब तक किसी तरह की जनहानि की सूचना नहीं मिली है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में हाथी को चर्च और अस्पताल परिसर में घूमते हुए देखा जा सकता है। घटना के बाद वन विभाग ने लोगों से हाथी के नजदीक जाकर वीडियो नहीं बनाने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है। विभाग का कहना है कि हाथी की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
जानकारी के मुताबिक रविवार सुबह कुनकुरी के आसपास के जंगलों से भटकता हुआ हाथी सबसे पहले महागिरजाघर के परिसर में पहुंचा। उस समय रविवार की प्रार्थना सभा में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं का आना शुरू हो चुका था। परिसर में हाथी को देखकर लोग घबरा गए और अपनी सुरक्षा के लिए प्रार्थना सभागार के भीतर चले गए। कुछ देर तक चर्च परिसर में घूमने के बाद हाथी वहां से निकलकर पास स्थित होलीक्रॉस अस्पताल में जा पहुंचा। यहां उसने अस्पताल की बाउंड्रीवाल को क्षतिग्रस्त कर दिया। हाथी के दीवार तोड़ने का वीडियो कुनकुरी नगर पंचायत अध्यक्ष विनयशील ने सोशल मीडिया पर साझा किया है। इसके बाद हाथी शहर के जय स्तंभ चौक के पास तक पहुंच गया। शहर के बीच हाथी को देखकर मौके पर लोगों की भीड़ जमा होने लगी। कुछ देर तक इधर-उधर घूमने के बाद हाथी वापस जंगल की ओर लौट गया। चर्च और अस्पताल परिसर कटनी-गुमला राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुनकुरी से जशपुर की ओर जाने वाली सड़क के पास स्थित हैं।
ऐसे में दिन के समय हाथी का इस तरह आबादी वाले क्षेत्र में पहुंचना लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया। हाथी के कुनकुरी शहर में पहुंचने के बाद स्थानीय लोगों ने समय रहते चेतावनी नहीं मिलने पर नाराजगी जताई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह लोनर हाथी पिछले कुछ दिनों से कुनकुरी के आसपास के ग्रामीण इलाकों के जंगलों में भटक रहा था। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब हाथी की गतिविधियों की जानकारी पहले से थी, तो नगरवासियों को समय रहते सतर्क क्यों नहीं किया गया? क्या प्रभावित इलाकों में सूचना पहुंचाने की व्यवस्था प्रभावी ढंग से काम कर रही थी? चर्च में प्रार्थना सभा और अस्पताल में मरीजों व परिजनों की आवाजाही के बीच हाथी का पहुंचना सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से भी गंभीर चिंता पैदा करता है। हालांकि, चेतावनी जारी करने में किसी तरह की चूक हुई या नहीं, इस संबंध में वन विभाग की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है।
जशपुर के आठ में से पांच ब्लॉक हाथी प्रभावित
जशपुर जिला छत्तीसगढ़ के प्रमुख हाथी प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। जिले के आठ विकासखंडों में से पांच में हाथियों की आवाजाही बनी रहती है। ओडिशा और झारखंड की अंतरराज्यीय सीमाओं से लगे दुलदुला, कुनकुरी और तपकरा वन परिक्षेत्र विशेष रूप से प्रभावित बताए जाते हैं। इन इलाकों में घने जंगल, पानी और भोजन की उपलब्धता के कारण हाथियों की गतिविधियां बनी रहती हैं। कई बार हाथी जंगल से निकलकर गांवों और आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं, जिससे लोगों की जान-माल को खतरा पैदा होता है।
तीन साल में हाथियों के हमले से 16 लोगों की मौत
जिले में मानव-हाथी संघर्ष का खतरा कितना गंभीर है, इसका अंदाजा वन विभाग के उपलब्ध कराए गए आंकड़ों से लगाया जा सकता है। विभाग के अनुसार, वर्ष 2024 में हाथियों के हमले से 4 लोगों की मौत हुई, जबकि वर्ष 2025 में 10 लोगों की जान गई। वर्ष 2026 में जनवरी से सितंबर तक 2 लोगों की मौत दर्ज की गई। इस तरह इन आंकड़ों के मुताबिक, तीन वर्षों में हाथियों के हमले से कुल 16 लोगों की जान जा चुकी है। मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग जागरूकता अभियान चलाने, हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने और प्रभावित गांवों तक सूचना पहुंचाने की व्यवस्था पर काम कर रहा है। ग्रामीणों को हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और उनके सामने आने पर सावधानी बरतने की जानकारी भी दी जा रही है।
निगरानी और चेतावनी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल
कुनकुरी शहर में हाथी के प्रवेश की घटना ने एक बार फिर मानव-हाथी संघर्ष से निपटने की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब जिले के कई वन परिक्षेत्र पहले से हाथी प्रभावित हैं और हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी रखने की व्यवस्था मौजूद है, तो आबादी वाले क्षेत्र में हाथी के पहुंचने से पहले लोगों तक सूचना पहुंचाना बेहद जरूरी हो जाता है। हाथी की गतिविधियों पर नजर रखना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी समय रहते लोगों को सतर्क करना भी है। चर्च, अस्पताल और व्यस्त सड़क के आसपास हाथी की मौजूदगी से बड़ा हादसा हो सकता था।
ऐसे में वन विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि हाथी की गतिविधियों की जानकारी कब मिली, कुनकुरी शहर के लोगों को चेतावनी दी गई थी या नहीं और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल हाथी के वापस जंगल की ओर लौटने से राहत जरूर मिली है, लेकिन जशपुर जैसे हाथी प्रभावित जिले में समय पर चेतावनी, बेहतर निगरानी और स्थानीय लोगों के साथ प्रभावी संवाद ही ऐसे खतरों को कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।


