बिलासपुर 27 जुलाई 2026। सोशल मीडिया पर बढ़ती ऑनलाइन ट्रोलिंग और मॉर्फ्ड कंटेंट के मामलों के बीच छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने भाजपा विधायक और पद्मश्री अनुज शर्मा की याचिका पर महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने उनके और उनके परिवार के खिलाफ प्रसारित कथित मानहानिकारक, मॉर्फ्ड और आपत्तिजनक सामग्री को गंभीरता से लेते हुए संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को विवादित कंटेंट तत्काल हटाने के निर्देश दिए हैं। याचिका में अनुज शर्मा ने आरोप लगाया है कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स और यूट्यूब पर फर्जी अकाउंट्स के जरिए उनकी पुरानी फिल्मों और गीतों को एडिट कर मॉर्फ्ड वीडियो, तस्वीरें और अन्य आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित की जा रही है। उनका कहना है कि इन पोस्टों का उद्देश्य उनकी सार्वजनिक छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना है।
भाजपा विधायक अनुज शर्मा की याचिका पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने दलील दी कि किसी व्यक्ति की पहचान, छवि या आवाज का बिना अनुमति इस्तेमाल करना उसके व्यक्तित्व अधिकार और संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत मिले निजता के अधिकार का उल्लंघन है। जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकलपीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स के संचालकों, चैनल एडमिन्स और कंटेंट क्रिएटर्स को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही कोर्ट ने अनुज शर्मा और उनके परिवार से जुड़े कथित मानहानिकारक, मॉर्फ्ड, अश्लील और आपत्तिजनक पोस्ट, वीडियो तथा कैरिकेचर हटाने के निर्देश भी दिए हैं।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की पहचान और छवि का बिना अनुमति व्यावसायिक या कथित दुष्प्रचार के उद्देश्य से इस्तेमाल किए जाने पर संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखना होगा। मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अनुज शर्मा ने कहा कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन इसकी आड़ में किसी व्यक्ति की गरिमा और पारिवारिक निजता पर हमला स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य मीडिया या आम जनता के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के कथित दुरुपयोग पर रोक लगाना और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है। फिलहाल हाई कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई में प्राप्त जवाब और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय होगी।

