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    Home»छत्तीसगढ़»CG: करोड़ों खर्च, जांच अधूरी… उधार के भवन में सिमटा बच्चों का भविष्य; स्कूल जतन योजना पर फिर उठे सवाल
    छत्तीसगढ़

    CG: करोड़ों खर्च, जांच अधूरी… उधार के भवन में सिमटा बच्चों का भविष्य; स्कूल जतन योजना पर फिर उठे सवाल

    DW HindiBy DW Hindi12/07/2026Updated:12/07/2026
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    गरियाबंद 12 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों की बदहाल तस्वीर एक बार फिर सामने आई है। गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक स्थित गाजीमुड़ा प्राथमिक शाला के बच्चे पिछले दो वर्षों से अपने स्कूल भवन के बजाय वन विभाग के एक आवास में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस स्कूल भवन के निर्माण को पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की ‘स्कूल जतन योजना‘ के तहत स्वीकृति मिली थी, उसका निर्माण आज तक पूरा नहीं हो सका। ऐसे में बच्चों का भविष्य उधार के भवन में सिमटकर रह गया है।

    जानकारी के मुताबिक गरियाबंद जिले के गाजीमुड़ा प्राथमिक शाला में वर्तमान में 26 छात्र-छात्राएं दर्ज हैं। लेकिन उनके पास अपना स्कूल भवन नहीं है। जर्जर भवन के कारण कक्षाएं वन विभाग के एक आवास में संचालित की जा रही हैं। शिक्षा के अधिकार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के सरकारी दावों के बीच यह तस्वीर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।

    स्कूल के शिक्षक नारायण सिन्हा ने बताया कि पुराना स्कूल भवन काफी जर्जर हो गया था, जिसमें कभी भी गंभीर हादसा होने की संभावना थी। जिसके कारण बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से अस्थायी व्यवस्था के तहत वन विभाग के आवास में स्कूल कोे शिफ्ट किया गया था। उम्मीद थी कि स्कूल जतन योजना के तहत नया भवन जल्द बन जाएगा, लेकिन दो साल बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। स्थिति यह है कि बच्चे आज भी अस्थायी भवन में पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि शिक्षा विभाग की ओर से स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

    बच्चों के भविष्य पर असर

    शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्राथमिक शिक्षा के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण बेहद जरूरी है। अस्थायी भवनों में लंबे समय तक पढ़ाई बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और मानसिक विकास तीनों पर असर डाल सकती है। ऐसे में संबंधित विभागों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे जल्द से जल्द स्थायी समाधान सुनिश्चित करें।

    स्कूल जतन योजना पर फिर उठे सवाल

    गरियाबंद के सरकारी स्कूल का यह मामला केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने ‘स्कूल जतन योजना‘ के तहत प्रदेशभर में जर्जर स्कूल भवनों के मरम्मत और निर्माण के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा किया था। हालांकि योजना के क्रियान्वयन को लेकर समय-समय पर अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप भी सामने आते रहे। सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्कूल जतन योजना में कथित अनियमितताओं और करोड़ों रुपये के खर्च की जांच कराने के निर्देश दिए थे। इस आदेश के बाद कई जिलों में स्कूल जतन योजना के अधूरे कार्यो को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिये गये। लेकिन आज ढाई साल बाद भी प्रदेश के अधिकांश जिलों में इस जांच की अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो सकी है और न ही जिम्मेदारों पर कोई बड़ी कार्रवाई सामने आई है।

    CM के आदेश के बाद भी जांच अधूरी

    स्कूल जतन योजना में कथित करोड़ोें रूपये के भ्रष्टाचार की जांच को लेकर सरकार ने सख्त कार्रवाई के संकेत दिये थे। लेकिन ढाई साल बीत जाने के बाद भी जांच का परिणाम सामने नहीं आना कई सवाल खड़े कर रहा है। यदि योजना में अनियमितताएं हुई थीं, तो जिम्मेदार कौन हैं ? और यदि नहीं हुईं, तो फिर स्कूल भवनों का निर्माण अधूरा क्यों है ? ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब अभी भी प्रदेश की जनता तलाश रही है। राज्य सरकार लगातार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के दावे कर रही है। लेकिन गाजीमुड़ा जैसे मामलों से साफ है कि जमीनी स्तर पर अभी भी कई स्कूल बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस स्कूल को नया भवन कब तक उपलब्ध करा पाता है और स्कूल जतन योजना की लंबित जांच कब अपने निष्कर्ष तक पहुंचती है।

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