कोरबा, 29 जुलाई 2026। कोरबा, 29 जुलाई 2026। कोरबा कलेक्टर कुणाल दुदावत ने जिला शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाते हुए जिला शिक्षा अधिकारी टी.पी. उपाध्याय को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जनदर्शन में महीनों से लंबित शिकायतों के निराकरण में लापरवाही, आवेदनों पर धीमी कार्रवाई और निःशुल्क पाठ्यपुस्तक योजना की कमजोर प्रगति को गंभीर मानते हुए कलेक्टर ने स्पष्ट कर दिया है कि जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नोटिस में तीन दिन के भीतर जवाब तलब किया गया है और चेतावनी दी गई है कि संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक मंगलवार 28 जुलाई को आयोजित समय-सीमा की बैठक में जब शिक्षा विभाग से जुड़े मामलों की समीक्षा हुई, तो कई शिकायतों में कार्रवाई न होने और संतोषजनक जानकारी प्रस्तुत न किए जाने पर कलेक्टर भड़क उठे। बैठक में सामने आया कि जनदर्शन में आए कई महत्वपूर्ण आवेदन लंबे समय से लंबित पड़े हैं और आवेदकों को राहत नहीं मिल सकी है। समीक्षा में जिन मामलों पर सबसे ज्यादा असंतोष सामने आया, उनमें—हाईस्कूल गोपालपुर में मानदेय व्याख्याता (गणित) भर्ती में अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थी का चयन नहीं होना, सेवानिवृत्त शिक्षक को जीवन निर्वाह राशि के भुगतान में देरी, अधिक मेरिट होने के बावजूद मानदेय शिक्षक चयन से वंचित अभ्यर्थियों की शिकायत, छात्र सुरक्षा बीमा योजना के पात्र हितग्राहियों को सहायता राशि समय पर नहीं मिलना रहा। कलेक्टर ने माना कि ये सभी मामले सीधे तौर पर आम नागरिकों और शिक्षकों से जुड़े हैं, फिर भी विभाग ने इन्हें गंभीरता से नहीं लिया।
बात यहीं खत्म नहीं हुई कलेक्टर ने निःशुल्क पाठ्यपुस्तक योजना 2026-27 की प्रगति पर भी कड़ा रुख अपनाया। कक्षा पहली से दसवीं तक की पुस्तकों की स्कैनिंग और प्रगति रिपोर्ट संतोषजनक नहीं पाए जाने पर उन्होंने इसे शासन की प्राथमिकता वाली योजना के प्रति उत्तरदायित्वहीन रवैया करार दिया। इन सारे गंभीर लापरवाहियों पर कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को कारण बताओं नोटिस जारी किया है। नोटिस मेें बकायदा जवाब तीन दिवस के भीतर संबंधित लिपिक, प्रधान पाठक या प्रभारी अधिकारी के साथ सभी आवश्यक अभिलेखों सहित उपस्थित होकर स्पष्ट और तथ्यात्मक स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। नोटिस में साफ चेतावनी भी दी गई है कि यदि तय समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी।
कलेक्टर का स्पष्ट संदेश: “जनहित के प्रकरण पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं”
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि जनदर्शन में आने वाली शिकायतें प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं और हर अधिकारी की जिम्मेदारी है कि नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध और संवेदनशील समाधान सुनिश्चित करे। उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन, जनशिकायतों के त्वरित निराकरण और प्रशासनिक जवाबदेही में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। कोरबा में कलेक्टर की इस कार्रवाई को प्रशासनिक स्तर पर कड़ा संदेश माना जा रहा है। लंबे समय से लंबित शिकायतों और शिक्षा विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली पर सीधे नोटिस जारी कर कलेक्टर ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब जवाबदेही तय होगी और लापरवाही करने वाले अधिकारियों को कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

