बालोद 23 जुलाई 2026। बालोद जिले में एक सरकारी स्कूल के शिक्षक के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराया गया है। आरोप है कि कक्षा में एक मिनट की देरी से पहुंचने पर शिक्षक ने 12 वर्षीय छात्र के साथ मारपीट की। छात्र के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने शिक्षक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं इस कार्रवाई के बाद शिक्षक संगठनों ने बिना विभागीय जांच सीधे एफआईआर दर्ज किए जाने पर गहरी नाराजगी जतातेे हुए सवाल उठाए हैं।
पुलिस के अनुसार मामला डौंडीलोहारा ब्लॉक के एक शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला का है। शिकायत में छात्र के पिता ने बताया कि उनका 12 वर्षीय बेटा जो कक्षा सातवीं में पढ़ता है, 20 जुलाई को बाथरूम जाने के बाद करीब एक मिनट की देरी से कक्षा में पहुंचा था। आरोप है कि इसी बात से नाराज शिक्षक लोकेश्वर निषाद ने छात्र की कॉलर पकड़कर गाली-गलौज की, उसकी छाती पर हाथ से प्रहार किया और सिर पकड़कर दीवार से टकरा दिया। घटना के बाद छात्र के सिर में दर्द और सूजन की शिकायत हुई।
परिजनों ने पहले घर पर प्राथमिक उपचार कराया और अगले दिन उसे डौंडीलोहारा के सरकारी अस्पताल ले जाकर इलाज कराया।परिजनों का यह भी दावा है कि घटना के समय कक्षा में मौजूद अन्य विद्यार्थियों ने कथित मारपीट और गाली-गलौज देखी और सुनी। उनका कहना है कि घटना के बाद बच्चा मानसिक रूप से डर गया है और अब स्कूल जाने से भी घबरा रहा है। शिकायत के आधार पर डौंडीलोहारा पुलिस ने शिक्षक लोकेश्वर निषाद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2) और 296 के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इधर, मामले ने नया मोड़ तब ले लिया जब विभिन्न शिक्षक संगठनों ने पुलिस कार्रवाई पर आपत्ति जताई। संगठनों का कहना है कि किसी भी शिक्षक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने से पहले शिक्षा विभाग की निष्पक्ष विभागीय जांच कराई जानी चाहिए थी। उनका आरोप है कि बिना प्रारंभिक जांच सीधे एफआईआर दर्ज करना उचित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। शिक्षक संगठनों ने इस मुद्दे पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। वहीं, घटना ने स्कूलों में अनुशासन बनाए रखने और बच्चों के अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

