रायपुर 17 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक भिड़ंत देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए 136 बिंदुओं का आरोप पत्र सदन के पटल पर रखा। इसके जवाब में भाजपा ने कांग्रेस की एकजुटता पर सवाल उठाए, जिसके बाद सदन में तंज, पलटवार और राजनीतिक कटाक्षों का दौर शुरू हो गया। अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत करते हुए डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि विष्णुदेव साय सरकार 135 सप्ताह पूरे कर चुकी है और अब 136वां सप्ताह चल रहा है। इसी आधार पर विपक्ष 136 बिंदुओं का आरोप पत्र लेकर आया है।
डॉ. चरणदास महंत ने आरोप लगाया कि सरकार का हर सप्ताह माताओं, बहनों और युवाओं के साथ किए गए वादों से जुड़े नए सवाल खड़े करता है। महंत ने कहा कि यह आरोप पत्र केवल कांग्रेस का नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता की आवाज है। चर्चा शुरू होने से पहले विधानसभा अध्यक्ष ने सभी सदस्यों से संसदीय मर्यादा और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। लेकिन जैसे ही नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर हमले तेज किए, सत्ता पक्ष की ओर से भी जवाबी प्रहार शुरू हो गया। भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा के 25 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि अविश्वास प्रस्ताव की शुरुआत खुद नेता प्रतिपक्ष कर रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इससे ऐसा प्रतीत होता है कि नेता प्रतिपक्ष को अपनी ही पार्टी के विधायकों पर भरोसा नहीं है। अजय चंद्राकर के इस बयान के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तत्काल सक्रिय हुए।
उन्होंने सदन में मौजूद कांग्रेस विधायकों से हाथ उठाकर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के प्रति समर्थन जताने को कहा। विपक्ष के सभी विधायकों ने हाथ उठाकर अपना समर्थन दर्ज कराया। हालांकि भाजपा ने इस मौके पर भी पलटवार का मौका नहीं छोड़ा। अजय चंद्राकर ने मुस्कुराते हुए कहा कि अब तो यह और भी बड़ी “कॉमेडी” हो गई कि नेता प्रतिपक्ष को अपनी ही पार्टी के विधायकों से सदन में विश्वास हासिल करना पड़ रहा है। भाजपा के वरिष्ठ विधायक धरमलाल कौशिक ने भी कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पार्टी की स्थिति ऐसी हो गई है कि नेताओं को अपने ही विधायकों से हाथ उठवाकर भरोसा जताना पड़ रहा है। सदन में बढ़ती नोकझोंक के बीच नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि चर्चा शुरू करने से पहले उन्होंने स्वयं भूपेश बघेल से पूछा था कि पहले कौन बोलेगा।
उन्होंने बताया कि भूपेश बघेल ने उनसे ही चर्चा की शुरुआत करने को कहा था और बाद में अपनी बात रखने की बात कही थी। इस पर अजय चंद्राकर ने फिर चुटकी लेते हुए कहा, “इसका मतलब साफ है कि आप उनसे पूछकर ही सारे काम करते हैं।” महंत ने भी बिना तल्खी के मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “आपस में पूछने में कोई हर्ज नहीं है। हम सब मिल-जुलकर काम करते हैं।” अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के पहले ही दिन सदन में जिस तरह आरोप, जवाब, तंज और राजनीतिक व्यंग्य का दौर चला, उसने साफ कर दिया कि यह बहस केवल सरकार के कामकाज तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि सत्ता और विपक्ष के बीच राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का बड़ा मंच भी बनने जा रही है।

