राजनांदगांव 13 अक्टूबर 2026। राजनांदगांव, 13 अक्टूबर 2026। राजनांदगांव पुलिस ने ग्राम चौथना में हुए मां-बेटे की हत्या के मामले को सुलझाते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी मृतक परिवार के ही सदस्य हैं। आरोप है कि महिला पर जादू-टोना करने के शक में उस पर हमला किया गया। इसके बाद उसके बेटे और बेटी पर भी जानलेवा हमला किया गया। इस वारदात में महिला और उसके बेटे की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बेटी गंभीर रूप से घायल है और अस्पताल में उसका इलाज जारी है। राजनांदगांव जिले में सामने आये इस हत्याकांड ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ में अंधविश्वास और जादू-टोने के शक में हो रही हिंसक वारदातों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। कुछ दिन पहले ही रायपुर जिले के आरंग क्षेत्र में भी जादू-टोने के शक में एक युवक पर पड़ोस में रहने वाले बुजुर्ग दंपति मौत के घाट उतार दिया था।
जानकारी के मुताबिक राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ थाना क्षेत्र के चौथना गांव में कमला सोनकर अपने परिवार के साथ रहती थीं। परिवार सब्जी बेचने का काम करता था। आरोप है कि परिवार की केशर सोनकर को शक था कि कमला जादू-टोना करती हैं और इसी वजह से परिवार के कुछ सदस्य बीमार पड़ रहे हैं। इसी शक को लेकर परिवार में विवाद चल रहा था। पुलिस के अनुसार 9 अक्टूबर की रात धारदार हथियार से कमला सोनकर और उनके बेटे खुमेन्द्र सोनकर पर हमला किया गया। हमले में मां-बेटे की मौत हो गई, जबकि बेटी ममता सोनकर गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना के समय कमला के पति सुखी सोनकर घर से बाहर थे। जब वह घर पहुंचे, तो पत्नी और बेटे के शव मिले, जबकि बेटी गंभीर हालत में पड़ी थी। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घायल ममता को अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे रायपुर रेफर किया गया।
दोहरी हत्या की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच के लिए संयुक्त टीम बनाई। घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और परिवार से जुड़े लोगों से पूछताछ के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई। संदेह के आधार पर हेमंत कुमार सोनकर (36) को 12 अक्टूबर को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ और जांच में उसके भाई सोनू सोनकर (34) और मां केशर सोनकर (55) की कथित भूमिका भी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने खुलासा किया कि वारदात के बाद आरोपियों ने सबूत मिटाने की कोशिश भी की। आरोप है कि घटना के समय पहने गए कपड़ों और हथियार की लकड़ी की मूठ को जलाने का प्रयास किया गया। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल लोहे की कुल्हाड़ी और मोटरसाइकिल बरामद की है। मौके से कपड़ों और लकड़ी की मूठ को जलाने के प्रयास से जुड़े अवशेष भी मिलने की बात कही गई है।
आरंग में भी जादू-टोने के शक में बुजुर्ग दंपति की हत्या
राजनांदगांव की यह घटना अकेली नहीं है। इससे पहले रायपुर जिले के आरंग क्षेत्र में भी अंधविश्वास से जुड़ी एक गंभीर वारदात सामने आई थी। वहां पड़ोस में रहने वाले बुजुर्ग दंपति की हत्या के मामले में एक युवक पर जादू-टोना करने के शक में हमला करने का आरोप लगा था। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं इस बात पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं कि बीमारी, पारिवारिक परेशानी या अन्य समस्याओं के लिए वैज्ञानिक और चिकित्सकीय कारण तलाशने के बजाय कुछ लोग जादू-टोने को जिम्मेदार मानकर हिंसा पर उतर आते हैं।
अंधविश्वास के नाम पर हिंसा, समाज के सामने गंभीर चुनौती
जादू-टोने का शक किसी भी व्यक्ति के खिलाफ हिंसा का औचित्य नहीं हो सकता। बीमारी का इलाज चिकित्सा से और विवादों का समाधान कानून के दायरे में होना चाहिए। लेकिन जब अंधविश्वास के आधार पर किसी को दोषी मान लिया जाता है, तो इसका नतीजा हत्या और गंभीर हिंसा जैसी घटनाओं के रूप में सामने आ सकता है। राजनांदगांव में मां-बेटे की हत्या और बेटी पर हमले के मामले ने एक बार फिर अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता, ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक सोच के प्रसार और ऐसे अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत को रेखांकित किया है।


