गरियाबंद 7 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में एक बार फिर बदहाल सड़क और पुल की कमी ने लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला मुख्यालय से करीब 16 किलोमीटर दूर आमदी (द) गांव के सती नाला में मंगलवार को एक ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर पलट गया। राहत की बात रही कि हादसे में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई. लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। सती नाला पर उच्चस्तरीय पुल निर्माण की मांग ग्रामीण और जनप्रतिनिधि करीब 15 वर्षों से कर रहे हैं।इसके बावजूद यहां स्थायी पुल का निर्माण नहीं हो सका है। क्षतिग्रस्त नाले से होकर वाहनों और ग्रामीणों की आवाजाही लगातार जारी है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुछ दिन पहले ही एक स्कूटी सवार महिला भी इसी नाले में गिर गई थी. हादसे के बाद महिला को इलाज के लिए गरियाबंद जिला अस्पताल ले जाया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि सती नाला पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। मंगलवार को ट्रैक्टर पलटने की घटना ने एक बार फिर इस समस्या को सामने ला दिया है। यह मार्ग दूसरे जिलों को भी जोड़ता है, इसलिए यहां लोगों और वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में पुल नहीं होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ इस मार्ग से गुजरने वाले अन्य वाहन चालकों के लिए भी जोखिम बना हुआ है। पुल निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने पहले चक्काजाम की चेतावनी भी दी थी। उस समय प्रशासन ने ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें समझाइश दी थी, जिसके बाद मामला शांत हुआ था।
हालांकि इसके बाद भी पुल निर्माण का स्थायी समाधान नहीं निकल सका। अब ट्रैक्टर हादसे के बाद एक बार फिर ग्रामीणों की मांग तेज होने लगी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 15 वर्षों से चली आ रही पुल की मांग पर अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई ? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है ? अगर यहां लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं, तो लोगों की सुरक्षा के लिए अस्थायी इंतजामों के बजाय स्थायी समाधान क्यों नहीं किया जा रहा ? ग्रामीणों के सामने अब सवाल यह भी है कि अपनी मांग मनवाने के लिए क्या उन्हें एक बार फिर चक्काजाम जैसे आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा ? सती नाला में हुए ताजा हादसे ने जिला प्रशासन के सामने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ग्रामीणों को सुरक्षित रास्ता कब मिलेगा और 15 साल पुरानी पुल की मांग आखिर कब पूरी होगी?


