रायपुर 6 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के गांवों की संस्कृति, जनजातीय परंपरा, प्राकृतिक खूबसूरती और स्थानीय जीवनशैली को देश-दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ी पहल की है। ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उत्कृष्ट काम करने वाले व्यक्ति या संस्था को अब ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा। चयनित विजेता को एक लाख रुपये की नकद राशि और प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। राज्य सरकार ने इसके लिए ‘चेन्दरू, राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार नियम, 2025’ लागू किए हैं। पुरस्कार का मकसद ग्रामीण पर्यटन को सिर्फ घूमने-फिरने तक सीमित रखने के बजाय इसे स्थानीय रोजगार, आजीविका, सांस्कृतिक संरक्षण और सतत विकास से जोड़ना है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गांव प्रदेश की संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक विरासत की जीवंत तस्वीर हैं। सरकार का प्रयास है कि पर्यटन का लाभ केवल बड़े और प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक सीमित न रहे, बल्कि दूरस्थ ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों तक भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से स्थानीय युवाओं, महिलाओं, स्व-सहायता समूहों, कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। ‘चेन्दरू’ पुरस्कार के जरिए ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिनसे ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है।
इसमें होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प, लोककला, लोकसंस्कृति, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और समुदाय आधारित पर्यटन जैसे क्षेत्रों को महत्व दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि पर्यटक जब किसी गांव में केवल घूमने के बजाय वहां की संस्कृति, खान-पान, परंपराओं और जीवनशैली का अनुभव करेगा, तो पर्यटन से होने वाली आय का सीधा लाभ स्थानीय समुदाय तक पहुंच सकेगा। आपको बता दे ‘चेन्दरू’ नाम छत्तीसगढ़ की एक विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है। इसी नाम से ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार शुरू कर सरकार अब उन लोगों और संस्थाओं को पहचान देने की तैयारी में है, जो जमीनी स्तर पर अपने गांव या क्षेत्र को पर्यटन से जोड़ने का काम कर रहे हैं।
हर साल मिलेगा एक लाख रुपये का पुरस्कार
नियमों के अनुसार चयनित व्यक्ति या संस्था को एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। किसी व्यक्ति को यह सम्मान उसके जीवनकाल में केवल एक बार दिया जा सकेगा। पुरस्कार के लिए प्राप्त प्रविष्टियों का मूल्यांकन छह सदस्यीय निर्णायक मंडल करेगा। जूरी की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध निदेशक करेंगे। मूल्यांकन में किए गए कार्य का प्रभाव, स्थानीय समुदाय की भागीदारी, रोजगार सृजन और प्राकृतिक व सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण जैसे पहलुओं को महत्व दिया जाएगा। ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड प्रमुख समाचार पत्रों के माध्यम से आवेदन आमंत्रित करेगा। आवेदकों को अपनी प्रोफाइल, फोटो, स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड तथा ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए गए कार्य और उपलब्धियों से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
राज्योत्सव में होगा सम्मान
चयनित विजेता या संस्था के प्रतिनिधि को राज्योत्सव के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा। साथ ही विजेता के काम, नवाचार और उपलब्धियों को सामने लाने वाली सचित्र स्मारिका भी जारी की जाएगी। छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पर्यटन की संभावनाएं काफी व्यापक हैं। बस्तर की जनजातीय संस्कृति, सरगुजा की प्राकृतिक सुंदरता, पारंपरिक व्यंजन, हस्तशिल्प, लोककला, मेले-पर्व, प्राकृतिक स्थल और ग्रामीण जीवनशैली पर्यटकों के लिए अलग अनुभव तैयार कर सकते हैं। राज्य सरकार की मौजूदा पर्यटन नीति में भी होमस्टे और स्थानीय समुदायों को पर्यटन से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में ‘चेन्दरू’ पुरस्कार को ग्रामीण पर्यटन से जुड़े जमीनी प्रयासों को पहचान देने और दूसरे गांवों को प्रेरित करने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार का लक्ष्य पर्यटन गतिविधियों को गांवों तक पहुंचाकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पहचान को व्यापक मंच देना है।


