रायपुर 19 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में मोटर वाहन से जुड़े काम कराने वाले लोगों के लिए परिवहन विभाग ने बड़ा बदलाव किया है। करीब 32 साल बाद विभिन्न परिवहन सेवाओं की फीस में संशोधन किया गया है। नई दरों को राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया है और इसके साथ ही कई सेवाओं के लिए अब लोगों को पहले की तुलना में अधिक शुल्क देना होगा। इसका सीधा असर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने या नवीनीकरण कराने वाले आम वाहन मालिकों से लेकर बस, टैक्सी, मालवाहक और अन्य व्यावसायिक वाहन संचालकों पर पड़ेगा। सबसे बड़ा झटका बस संचालकों को लगा है, क्योंकि बस परमिट का शुल्क 2,500 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया गया है।
परिवहन विभाग ने लंबे अंतराल के बाद मोटर यान से संबंधित विभिन्न सेवाओं की दरों में बदलाव किया है। अब डुप्लीकेट ड्राइविंग लाइसेंस, लाइसेंस नवीनीकरण, ड्राइविंग बैज, मेडिकल प्रमाण पत्र और परमिट से जुड़ी कई सेवाओं के लिए नई दर के अनुसार भुगतान करना होगा। इससे उन लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा, जिन्हें परिवहन विभाग से संबंधित सेवाओं के लिए नियमित रूप से आवेदन करना पड़ता है। नई व्यवस्था में बस परमिट की फीस में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। पहले जहां 2,500 रुपये शुल्क देना होता था, वहीं अब इसके लिए 10,000 रुपये देने होंगे। इसके अलावा परमिट के नवीनीकरण, परमिट में संशोधन, वाहन बदलने और वाहन को दूसरे व्यक्ति के नाम करने जैसी प्रक्रियाओं के लिए भी नई शुल्क दरें लागू की गई हैं।
राजपत्र में प्रकाशन के साथ नई दरें लागू
परिवहन विभाग की नई फीस को राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया है। राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से ही नई दरें प्रभावी मानी गई हैं। यानी अब परिवहन विभाग की संबंधित सेवाओं के लिए आवेदन करने वालों को पुरानी फीस के बजाय नई दरों के अनुसार भुगतान करना होगा। अगर आपका ड्राइविंग लाइसेंस नवीनीकरण, डुप्लीकेट लाइसेंस, परमिट या वाहन से संबंधित कोई काम लंबित है, तो आवेदन करने से पहले नई शुल्क दर जरूर जांच लें। खासकर व्यावसायिक वाहन मालिक परमिट की वैधता खत्म होने से पहले उसका नवीनीकरण करा लें, ताकि देरी के कारण अतिरिक्त शुल्क का बोझ न पड़े। फीस बढ़ोतरी के बाद अब परिवहन विभाग से जुड़ा छोटा-बड़ा काम कराने से पहले जेब पर पड़ने वाले अतिरिक्त खर्च का हिसाब रखना जरूरी हो गया है।
व्यावसायिक वाहन मालिकों पर ज्यादा असर
नई फीस का सबसे अधिक असर यात्री बस, टैक्सी, मालवाहक और अन्य व्यावसायिक वाहन संचालकों पर पड़ने की संभावना है। परमिट बनवाने से लेकर उसके नवीनीकरण और उसमें किसी तरह का बदलाव कराने तक अब पहले की तुलना में अधिक राशि खर्च करनी होगी। ऐसे में परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए वाहन संचालन की लागत बढ़ने का दबाव भी बढ़ सकता है।
परमिट रिन्यू कराने में देरी तो जेब पर और बोझ
परिवहन विभाग ने परमिट के नवीनीकरण में देरी को भी महंगा कर दिया है। परमिट की वैधता खत्म होने के बाद जितनी ज्यादा देरी होगी, शुल्क भी उसी के अनुसार बढ़ता जाएगा। 90 दिन, 180 दिन, 365 दिन और उससे अधिक की देरी के लिए अलग-अलग शुल्क व्यवस्था रखी गई है। यानी परमिट की तारीख निकलने के बाद उसे लंबे समय तक लंबित रखना वाहन मालिक को महंगा पड़ सकता है।इसलिए व्यावसायिक वाहन मालिकों के लिए परमिट की वैधता और नवीनीकरण की तारीख पर विशेष ध्यान देना जरूरी होगा।
किसानों और SC-ST आवेदकों को राहत
फीस बढ़ोतरी के बीच कुछ वर्गों को राहत भी दी गई है। किसान के नाम पर दर्ज ट्रैक्टर या ट्रॉली से संबंधित परमिट प्रक्रिया के लिए शुल्क नहीं लिया जाएगा। वहीं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आवेदकों को निर्धारित शुल्क का 50 प्रतिशत ही देना होगा। इसके लिए संबंधित वर्ग का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना जरूरी होगा।
आम वाहन मालिकों को भी नहीं मिली पूरी राहत
फीस बढ़ोतरी का असर केवल व्यावसायिक वाहनों तक सीमित नहीं है। आम वाहन मालिकों के लिए भी कई सेवाएं महंगी हुई हैं।
इनमें प्रमुख रूप से—
- डुप्लीकेट ड्राइविंग लाइसेंस
- ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण
- ड्राइविंग बैज
- मेडिकल प्रमाण पत्र
- परमिट में संशोधन
- वाहन बदलने की प्रक्रिया
- परमिट ट्रांसफर
जैसी सेवाएं शामिल हैं।


