बिलासपुर 8 अगस्त 2026। बिलासपुर में सड़कों के निर्माण के दौरान फुटपाथ के गायब होने, उस पर अवैध कब्जे और बेतरतीब पार्किंग को लेकर दायर जनहित याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने नगर निगम आयुक्त से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने निगम आयुक्त से शपथपत्र के साथ यह बताने को कहा है कि शहर में फुटपाथों को अतिक्रमण से बचाने और पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।
जानकारी के मुताबिक याचिकाकर्ता संस्कार राजपूत ने हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया है कि सार्वजनिक फुटपाथों पर अवैध कब्जों और ट्रैफिक पुलिस के लचर रवैये से बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगों का सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है। नगर निगम और पुलिस प्रशासन को बार-बार शिकायत देने व आरटीआई लगाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। याचिका में नेहरू नगर से दर्रीघाट तक चल रहे सड़क निर्माण का भी जिक्र किया गया है। आरोप है कि नेहरू चौक से गोलबाजार, जूना बिलासपुर, दयालबंद और आगे तक सड़क निर्माण के दौरान कई जगह फुटपाथ को सड़क में ही मिला दिया गया।
इसका सीधा असर पैदल चलने वालों पर पड़ा है। जहां फुटपाथ होना चाहिए, वहां सड़क का हिस्सा दिखाई देता है और लोगों को वाहनों के बीच सड़क पर चलना पड़ता है। इससे दुर्घटना का खतरा भी बढ़ गया है। इस प्रकरण की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पैदल चलने का अधिकार संविधान के तहत नागरिकों का मौलिक अधिकार है। ऐसे में फुटपाथों का संरक्षण करना और उन्हें अतिक्रमण से मुक्त रखना नगर निगम का नैतिक ही नहीं, बल्कि कानूनी दायित्व भी है। डिवीजन बेंच ने निगम आयुक्त से पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन के लिए जमीन पर अब तक क्या प्रभावी कदम उठाए गए हैं।
प्रशासन ने कार्रवाई के किए दावे
सुनवाई के दौरान नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस और जिला प्रशासन की ओर से बताया गया कि अतिक्रमण हटाने, मल्टीलेवल पार्किंग बनाने और सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार कार्रवाई की जा रही है। ट्रैफिक पुलिस ने बताया कि वर्ष 2024 में यातायात नियमों के उल्लंघन पर 67 हजार से ज्यादा चालान काटे गए। लेकिन याचिकाकर्ता ने हाल के फोटोग्राफ और मीडिया रिपोर्ट्स अदालत के सामने पेश करते हुए इन दावों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि कागजों में कार्रवाई होने के बावजूद जमीन पर हालात नहीं बदले हैं। याचिकाकर्ता के मुताबिक शहर के कई फुटपाथों पर आज भी दुकानों का कब्जा है और जगह-जगह वाहन खड़े रहते हैं।
इसके अलावा शहर में पार्किंग व्यवस्था को लेकर कोई दीर्घकालिक और प्रभावी नीति नहीं होने का भी आरोप लगाया गया है। अब हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद नगर निगम को यह बताना होगा कि फुटपाथों की सुरक्षा के लिए वास्तव में क्या कदम उठाए गए हैं और कागजों पर होने वाली कार्रवाई का असर जमीन पर क्यों नजर नहीं आ रहा। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी। अब नजर इस बात पर है कि निगम आयुक्त अदालत के सामने क्या जवाब पेश करते हैं और बिलासपुर में पैदल चलने वालों के अधिकार को सुरक्षित करने के लिए आगे क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

