रायपुर 21 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में अतिथि शिक्षकों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। संविलियन, सेवा सुरक्षा, समान वेतन और मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदेशभर के एक हजार से अधिक अतिथि शिक्षक पिछले 20 दिनों से धरने पर बैठे हैं। सोमवार को आंदोलन ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के निवास का घेराव करने के लिए मार्च निकाला। बारिश के बीच निकली रैली में बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। शाम होते-होते प्रदर्शनकारियों ने मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाकर सरकार के खिलाफ सांकेतिक विरोध जताया और देर रात तक शिक्षा मंत्री के बंगले के बाहर सड़क पर डटे रहे।
राज्य अतिथि शिक्षक संघ के हड़ताल प्रमुख धर्मेंद्र दास वैष्णव का कहना है कि प्रदेश के हजारों अतिथि शिक्षक पिछले 11 वर्षों से दूर-दराज और नक्सल प्रभावित इलाकों में शिक्षा की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन आज भी वे नियमित कर्मचारी का दर्जा मिलने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर महीने मिलने वाले 20 हजार रुपये के मानदेय में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। किराया, बिजली-पानी, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना बड़ी चुनौती बन गई हैं। कई बार ऐसी स्थिति आ जाती है कि परिवार की मदद करने के बजाय खुद घर से आर्थिक सहायता मांगनी पड़ती है।
प्रदर्शनकारी शिक्षकों का दावा है कि उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगाई और बच्चों को बंदूक की जगह कलम थामने के लिए प्रेरित किया। इसके बावजूद वर्षों की सेवा के बाद भी उन्हें सेवा सुरक्षा और सम्मानजनक वेतन नहीं मिल सका। अतिथि शिक्षक सरकार से संविलियन, सेवा सुरक्षा, समान कार्य के लिए समान वेतन और मानदेय में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक इन मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारी शिक्षकों के इस फैसले के बाद अब सभी की नजरें राज्य सरकार पर हैं।

