रायपुर16 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन नया रायपुर की महत्वाकांक्षी सेवाग्राम परियोजना सत्ता पक्ष के लिए ही असहज सवालों का कारण बन गई। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने अपनी ही सरकार से परियोजना पर हुए करोड़ों रुपये के खर्च और उसकी उपयोगिता को लेकर तीखे सवाल पूछे। उन्होंने वित्त मंत्री ओपी चौधरी से जानना चाहा कि बिना स्पष्ट उद्देश्य और संस्थागत व्यवस्था के आखिर 129 करोड़ रुपये कैसे खर्च कर दिए गए। प्रश्नकाल के दौरान अजय चंद्राकर ने कहा कि किसी भी सरकारी परियोजना में सार्वजनिक धन खर्च करने से पहले उसकी आवश्यकता, उपयोगिता और नियमों के अनुरूप स्वीकृति जरूरी होती है। उन्होंने सदन में सवाल उठाते हुए कहा, “सेवाग्राम आखिर है क्या ? बिना किसी सेटअप और उपयोगिता के 129 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए।
बीजेपी विधायक अजय चंद्राकर ने सवाल उठाते हुए मंत्री ओपी चौधरी से पूछा कि क्या बिजनेस रूल इसकी अनुमति देता है ? किसी एक व्यक्ति की इच्छा पूरी करने के लिए 200 करोड़ रुपये तक खर्च नहीं किए जा सकते। यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी ?” सत्ता पक्ष के वरिष्ठ विधायक की ओर से उठाए गए इन सवालों ने सदन में हलचल पैदा कर दी। चर्चा के दौरान यह मुद्दा केवल परियोजना की लागत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकारी निर्णय प्रक्रिया और वित्तीय जवाबदेही पर भी सवाल खड़े हुए। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने जवाब देते हुए कहा कि सेवाग्राम परियोजना पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार पूरे मामले की नियमानुसार समीक्षा कर रही है और परियोजना से जुड़े सभी दस्तावेज संबंधित सदस्यों को उपलब्ध कराए जाएंगे।
मंत्री ने सदन को भरोसा दिलाया कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि किसी भी स्तर पर बिजनेस रूल का उल्लंघन न हो। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की प्रक्रियागत खामी सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सरकार सेवाग्राम के संचालन को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में काम करेगी। सदन में हुई इस बहस ने यह संकेत दिया कि नई सरकार पिछली सरकार की बड़ी परियोजनाओं के वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों की समीक्षा के मूड में है। वहीं, सत्ता पक्ष के भीतर से उठे सवालों ने सेवाग्राम परियोजना को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया।

